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कारिका : 11 , 12 , 13 का सार

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 💐कारिका : 11 , 12 और 13 का सार .... 👌प्रकृति और पुरुष की पहचान और तीन गुणों की वृत्तियों को यहाँ बताया जा रहा है । मूल प्रकृति 03 गुणों ( सात्त्विक , राजस और तामस ) की साम्यावस्था का नाम है जो पुरुष ऊर्जा से अपनीं साम्यावस्था खो कर सक्रिय हो उठती है और फलस्वरूप 23 तत्त्वों की उत्पत्ति होती है । ये 23 तत्त्व सृष्टि रचना के सर्ग हैं । 💐अगले अंक में कारिका : 11 , 12 और 13 का संक्षिप्त सार दिया जाएगा जिससे स्मरण करना सरल हो सके। 👌सब 03 स्लाइड्स को देखे 👇

सांख्य कारिका : 1 - 10 सार भाग - 3

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  💐 सांख्य कारिका : 1 - 10 के सार का यह आखिरी भाग है। इन 10 कारिकाओं में 03 कारिकाएँ प्रकृति - पुरुष से सम्बंधित हैं । 03 कारिकाओं का सम्बन्ध प्रमाण से है और प्रारंभिक 02 कारिकाओं का सम्बन्ध दुःख और दुःख निवारण से है । कारिका : 3 , 7 और 8 प्रकृति और पुरुष को व्यक्त कर रही है। प्रकृति के लिए सांख्य कारिका : 3 कहती है , " 03 हूणों की साम्यावस्था को मूल प्रकृति या अव्यक्त कहते हैं जो सनातन अविकृत , अनादि ,  त्रिगुणी और किसी से उत्पन नहीं है । पुरुष गुणातीत , सनातन और चेतन है । 💐 सांख्य दर्शन कोई मनोरंजन का साधन नहीं , यह बुद्धि योग का सागर है जिसके प्रमुख मात्र 02 तत्त्व हैं - प्रकृति और पुरुष। 💐 प्रकृति - पुरुष के संयोग की भूमि है चित्त जो पुरुष ओरभाव के कारण प्रकृति से उत्पन्न होता है और जिसे अंतःकरण ( मन + बुद्धि +अहँकार ) भी कहते हैं । 👌अब देखते हैं स्लाइड - 3 👇

सांख्य कारिका : 1 - 10 सार भाग : 2

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  💐 सांख्य दर्शन में आत्मा , जीवात्मा , ब्रह्म और परमात्मा के संबोधनों की अनुपस्थिति है । सांख्य दर्शन को भी यहाँ के बुद्धि जीवी वर्ग के लोग दो भागों में विभक्त कर रखा है । एक वर्ग पुरुष शब्द का अर्थ ईश्वर लगता है तो दूसरा वर्ग पूर्ण रूपेण इसे अनैश्वरबादी दर्शन के रूप में देखता है । 👌 जबतक हम सांख्य दर्शन के सूत्रों को ठीक - ठीक नहीं समझ लेते तबतक पतंजलि योग दर्शन और अन्य भारतीय दर्शनों में दी गयी साधना सम्बंधित बातों को समझना संभव नहीं।  💐 यहाँ हम सांख्य कारिका : 1 - 10 तक के सार को 03 स्लाइड्स में दे रहे है । इसे देने का मात्र एक कारण है और वह यह है कि पहले कारिका : 1 - 10 तक को दिया जा चुका है अतः उनकी पुनरावृत्ति करना उचित न था पर स्मृति में इन कारिकाओं को बनाये रखने के उद्देश्य से संक्षेप में इनका हिंदी भावार्थ एक बार पुनः दे रहा हूँ जिससे आगे की कारिकाओं को ठीक से समझा जा सके । आगे कारिका 11 - 72 को विस्तार से दिया जाएगा जिसमें संस्कृत के सूत्र भी देखे जा सकते हैं। 👌 अब देखते हैं स्लाइड - 2 को ⬇️

सांख्य कारिका : 1 - 10 भाग - 01

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  💐 प्राचीनतम भारतीय दर्शन सांख्य दर्शन मूलतः सृष्टि रचना का विज्ञान है । सृष्टि की रचना कैसे हुई , जीव कण क्या है , जीव - विकास कैसे हुआ आदि प्रश्नों का उत्तर आज के वैज्ञानिक खोज रहे हैं ।  वैज्ञानिक तो अभीं वर्तमान शताब्दी में इन प्रश्नों के उत्तर को खोजने का प्रयाश प्रारम्भ किये हैं । लेकिन कपिल मुनि जो सांख्य दर्शन के निर्माता माने जाते हैं , इस कल्प के प्रारंभ में पूर्ण रूप से वैज्ञानिक तर्क के आधार पर सांख्य माध्यम से इन प्रश्नों का समाधान कर चुके हैं । बहुत दु:ख होता है कि सांख्य आधारित जीव - विकास सिद्धान्त पता नहीं क्यों अभीं तक वैज्ञानिकों की दृष्टि से वंचित रहा ।  👌 Prof. Einstein  जैसे वैज्ञानिक गीता के कुछ श्लोकों से आकर्षित तो हुए दिखते हैं लेकिन गीता में दिए गए कुछ ऐसे  सांख्य - सूत्र जो उनकी खोज की दिशा को एक और नया मार्ग दिखा सकते थे , उनकी दृष्टि से दूर रह गए । 👌 सांख्य दर्शन में ईश्वर कृष्ण रचित 72 कारिकाओं में से प्रारंभिक 10 कारिकाओं को हम 03 स्लाइड्स के माध्यम से दे रहें जिनमें से आज पहली स्लाइड आप यहाँ देख रहे हैं 💐इस बात को न भूलें कि सांख्य के बिना अन्य भार

सांख्य कारिका :1 -10 तक का सार - 1

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 💐 सांख्य दर्शन में ईश्वर कृष्ण रचित केवल 72 कारिकाएँ आज उपलब्ध हैं ।  👌 सांख्य दर्शन के सम्बन्ध में केवल इतना समझ लेना पर्याप्त होगा कि सृष्टि रचना का रहस्य चाहे वह द्वैत्य बाद का हो या फिर अद्वैत्य बाद का हो , सारे सिद्धान्त मूलतः सांख्य सिद्धान्त आधारित ही हैं । अब देखते हैं इस स्लाइड को ⬇️

कारिका : 10 : व्यक्त - अव्यक्त में भेद

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  ध्यान रखना होगा कि मूल प्रकृति को अव्यक्त कहते हैं और उसकी विकृति के फलस्वरूप उपजे 23 सर्ग व्यक्त कहलाते हैं। तीन गुणों की साम्यावस्था को मूल प्रकृति कहते हैं । // ॐ //