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गीता मर्म -12

मोहन प्यारे हमें कुछ साल सूडान [ अफ्रिका ] में रहनें का मौका मिला था । वहाँ के लोग सुन्नी मुस्लिम हैं । जब मैं कन्हैया की फोटो लोगों की गाड़ियों में लगी देखी तो एक दिन अपनें एक सूडानी दोस्त से पूछा - आप क्यों इस बच्चे की फोटो अपनें कार में लगा रखी है ? उत्तर बहुत ही सीधा था -- उनका कहना था , यह बच्चा है हिन्दुस्तानी और बहुत ही खुबसूरत है , इसलिए हमलोग इसे लगाते हैं , अपनी - अपनी कारों में । भक्त लोग मोहन प्यारे को अपनें - अपनें दिल में बिठा के रखना चाहते हैं और उनको यह पता शायद न हो की उनका मोहन प्यारे कुरुक्षेत्र में महाभारत युद्ध - द्वार पर मोह - मुक्त की दवा गीता के रूप में बनाते हैं , अर्जुन के मोह को दूर करनें के लिए । मोहन प्यारे एक तरफ सांख्य - योगी के रूप में समभाव की शिक्षा देते हैं और दूसरी तरफ गोपियों के साथ रास रचाते हैं । मोहन प्यारे एक तरफ सारथी बन कर अर्जुन का रथ चलाते हैं और दूसरी तरफ माखन चोर के रूप में गोपियों का दिल जीतते हैं । मोहन प्यारे हैं एक लेकीन अनेक रूपों में , हमें और क्या चाहिए ? जो रूप भा जाए उसे अपनाना ही भक्ति - योग है । ===== ॐ ======