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गीता अमृत - 13

राग - भय प्रभु से दूर रखते हैं गीता [ सूत्र 4.10 ] कहता है ------ राग , भय और क्रोध प्रभु से दूर रखते हैं --आखिर राग , भय क्रोध हैं क्या ? इसको जाननें के लिए , देखिये गीता सूत्र -- 2.47 - 2.52, 2.59 - 2.60, 2.62 - 2.63, 2.71, 3.7, 3.19 - 3.20, 3.25, 3.26, 3.37 - 3.42, 4.10, 4.19, 4.23, 5.10, 5.11, 5.23, 5.26, 6.2, 6.4, 6.24, 6.27, 7.20, 7.27, 8.11, 13.8, 14.7, 14.17. 16.21, 18.72, 18.73 गीता यहाँ अपनें 43 श्लोकों में कह रहा है ------ राग - क्रोध राजस गुण के तत्त्व हैं और भय तामस गुण का तत्त्व है - अर्थात राजस एवं तामस गुण प्रभु से मिलनें नहीं देते । क्रोध काम ऊर्जा का रूपांतरण है जो कामना में बिघ्न पड्नें पर पैदा होता है । राजस एवं तामस गुणों की पकड़ जब समाप्त हो जाती है तब सम - भाव आता है , सम भाव ही एक ऐसा माध्यम है जो प्रभु से जोड़ता है । गीता गुणों का विज्ञान है , गीता उनके लिए है जो बुद्धि केन्द्रित लोग हैं । आप गीता को अपना कर प्रभु से दूर नहीं रह सकते । ====ॐ====