भक्त कभीं रोता हुआऔर कभीं हँसता हुआ दिखता है , ऐसा क्यो? भक्त भी चित्त माध्य से प्रभु के जुड़ता और बिछुड़ता रहता है । चित्त की 05भूमियाँ हैं ; क्षिप्ति , मूढ़ , विक्षिप्ति , एकाग्रता और निरु। निरु उच्चतम भूमि है और क्षिप्ति निम्नतम। जब भक्त का चित्त उच्च भूमियों में होता है , उस समय वह परम से जुड़ा होता है और हँसता रहता है । लेकिन जब उसका चित्त नीचे की भूमियों पर होता है , तब रोता है । परम हंस रामकृष्ण जी की समाधि जब टूटती थी तब रोते - रोते गुनगुनाते हुए बोलते थे - माँ ! मैं तो वहीँ थीक था , यहाँ क्यों ले आयी ? यह स्थिति है , उच्च भूमियों से निम्न भूमियों पर चित्त का लौटना ।